प्रदेश सरकार द्वारा प्राइवेट स्कूलों पर लागू किए गए शिक्षा के अधिकार के नियम 134ए के विरोध में शनिवार को यहां छावनी के गांधी ग्राउंड में विराट शिक्षा सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में प्रदेशभर से हजारों लोग अंबाला पहंुचे। प्राइवेट स्कूल संचालकों और स्टाफ ने नियम 134ए को तुरंत प्रभाव से समाप्त करने की मांग की। सम्मेलन के बाद डीसी को विभिन्न मांगों के समर्थन में यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी, कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नाम ज्ञापन सौंपा गया। फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की ओर से दिए गए ज्ञापन में नियम 134ए को निरस्त करने, आरटीई एक्ट में प्रभावी संशोधन करने, स्कूलों की मान्यता संबंधी लंबित चल रहे आवेदनों पर विचार कर इन्हें तुरंत स्थाई मान्यता देने की मांग की गई। इसके साथ ही 10 अप्रैल 2007 से पहले के नोटिफाइड होने से बचे स्कूलों एग्जिस्टिंग लिस्ट में शामिल करने,
23 मार्च 2007 को 96 स्कूल संचालकों पर दर्ज मामलों को वापस लेने, मान्यता प्राप्त स्कूलों को जमीन से छूट देते हुए पुराने नियमों को अपग्रेड करने की भी मांग की गई। ज्ञापन में प्राइवेट स्कूलों से सीएलयू व एनओसी की शर्त हटाने, सभी जिलों में ड्राइवरों के लिए ट्रेनिंग सेंटर खोलने, मान्यता प्राप्त स्कूलों से फार्म नंबर एक न भरवाने, प्राइवेट स्कूलों से बिजली के बिल कमर्शियल रेट पर न लेने व पानी की सप्लाई निश्शुल्क देने की मांग की गई। इस दौरान फेडरेशन के प्रधान कुलभूषण शर्मा सहित कई पदाधिकारियों ने मंच से उपस्थित जनों को संबोधित किया। वक्ताओं ने अपने संबोधन में नियमावली 134ए को स्कूल संचालकों के लिए खतरनाक बताते हुए शिक्षा विभाग व प्रदेश सरकार की जमकर आलोचना की। सम्मेलन में प्रदेशभर के शिक्षकों ने भी भाग लिया।
23 मार्च 2007 को 96 स्कूल संचालकों पर दर्ज मामलों को वापस लेने, मान्यता प्राप्त स्कूलों को जमीन से छूट देते हुए पुराने नियमों को अपग्रेड करने की भी मांग की गई। ज्ञापन में प्राइवेट स्कूलों से सीएलयू व एनओसी की शर्त हटाने, सभी जिलों में ड्राइवरों के लिए ट्रेनिंग सेंटर खोलने, मान्यता प्राप्त स्कूलों से फार्म नंबर एक न भरवाने, प्राइवेट स्कूलों से बिजली के बिल कमर्शियल रेट पर न लेने व पानी की सप्लाई निश्शुल्क देने की मांग की गई। इस दौरान फेडरेशन के प्रधान कुलभूषण शर्मा सहित कई पदाधिकारियों ने मंच से उपस्थित जनों को संबोधित किया। वक्ताओं ने अपने संबोधन में नियमावली 134ए को स्कूल संचालकों के लिए खतरनाक बताते हुए शिक्षा विभाग व प्रदेश सरकार की जमकर आलोचना की। सम्मेलन में प्रदेशभर के शिक्षकों ने भी भाग लिया।