प्रदेश के छात्रों का इंजीनियरिंग की पढ़ाई से मोह भंग होता नजर आ रहा है। प्रदेश के 194 बहुतकनीकी कालेजों में (इंजीनियरिंग, फार्मेसी और मैनेजमेंट को मिलाकर) सीटें तो 63470 हैं, जबकि दाखिला परीक्षा करीब 55 हजार उम्मीदवारों ने ही दी। तकनीकी शिक्षा बोर्ड भी विद्यार्थियों की तकनीकी शिक्षा के प्रति बढ़ती उदासीनता से चिंतित है। बोर्ड उम्मीदवारों की कमी की जांच करेगा।
विद्यार्थियों की प्राथमिकता राजकीय बहुतकनीकी संस्थानों में दाखिला लेने की होती है। इसका कारण यह है कि इन कालेजों में फीस 5200 रुपये सालाना और लड़कियों की पूरी तरह माफ होती है। वहीं प्राइवेट कालेजों में फीस का आंकड़ा 30 हजार के आसपास होता है। प्रदेश में 194 इंस्टीट्यूट हैं, जिनमें 25 सरकारी और चार एडिड कालेज हैं। राजकीय कालेजों में 10975 सीटें हैं।
प्राइवेट पॉलीटेक्निक कालेजों में सीट्स को भरने के लिए संचालकों को निगाहें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश आदि पड़ोसी राज्यों पर लगी हैं। निजी कालेज संचालक बिना एंट्रेंस एग्जाम के ही दाखिला दे देते हैं।
>घटते रुझान से तकनीकी शिक्षा बोर्ड चिंतित
>ग्रे एरिया की कराई जाएगी जांच
मामले की होगी जांच: संयुक्त निदेशक
तकनीकी शिक्षा बोर्ड के संयुक्त सचिव केके धीमान ने माना की इस बार सीटों से कम उम्मीदवारों ने परीक्षा दी है। बोर्ड ग्रे एरिया की जांच कराएगा। सरकार से भी सिफारिश की जाएगी कि डेट सभी कालेजों और उम्मीदवारों के लिए अनिवार्य की जाए। वर्तमान में निजी कालेजों को बिना प्रवेश परीक्षा के दाखिले करने का अधिकार दिया है। इसका खामियाजा राजकीय कालेजों को भुगतना पड़ता है।