सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी अब स्कूल प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए ग्रीष्मावकाश के दौरान क्लस्टर स्तर पर प्रशिक्षण शिविर लगाने का कार्यक्रम तय किया गया है। विभाग के मास्टर ट्रेनर अभिभावकों को स्कूलों से संबंधित विभागीय कार्रवाई के बारे में जानकारी देंगे।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत गत वर्ष स्कूल स्तर पर स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) का गठन किया गया था। इस कमेटी में छात्रों के अभिभावकों को शामिल किया गया था। इसमें 33 प्रतिशत संख्या महिला अभिभावकों की थी।
इन अभिभावकों को स्कूल प्रबंधन से संबंधित अधिकार दिए गए थे, मगर अभी भी ऐसी कई कमेटियां हैं, जिनके पदाधिकारी केवल रबड़ स्टाम्प के तौर पर कार्य कर रहे थे। ऐसे में विभागीय योजना का बच्चों को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा था। इसी को देखते हुए विभाग ने गर्मियों की छुट्टियों के दौरान इन अभिभावकों को प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों के ज्ञान में भी बढ़ोतरी होगी।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत लगाए जाने वाले इन प्रशिक्षण शिविरों में एसएमसी पदाधिकारियों को स्कूली गतिविधियों से अवगत कराया जाएगा। मास्टर ट्रेनर अभिभावकों को स्कूलों में दी जाने वाली ग्रांट, ग्रांट को कैसे खर्च करने और उसका हिसाब किताब रखने, विभिन्न कागजी कार्रवाई, अधिकारियों से मिलकर समस्याओं का समाधान कराने और स्कूलों के शैक्षणिक स्तर को बढ़ाने सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी देंगे।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत गत वर्ष स्कूल स्तर पर स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) का गठन किया गया था। इस कमेटी में छात्रों के अभिभावकों को शामिल किया गया था। इसमें 33 प्रतिशत संख्या महिला अभिभावकों की थी।
इन अभिभावकों को स्कूल प्रबंधन से संबंधित अधिकार दिए गए थे, मगर अभी भी ऐसी कई कमेटियां हैं, जिनके पदाधिकारी केवल रबड़ स्टाम्प के तौर पर कार्य कर रहे थे। ऐसे में विभागीय योजना का बच्चों को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा था। इसी को देखते हुए विभाग ने गर्मियों की छुट्टियों के दौरान इन अभिभावकों को प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों के ज्ञान में भी बढ़ोतरी होगी।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत लगाए जाने वाले इन प्रशिक्षण शिविरों में एसएमसी पदाधिकारियों को स्कूली गतिविधियों से अवगत कराया जाएगा। मास्टर ट्रेनर अभिभावकों को स्कूलों में दी जाने वाली ग्रांट, ग्रांट को कैसे खर्च करने और उसका हिसाब किताब रखने, विभिन्न कागजी कार्रवाई, अधिकारियों से मिलकर समस्याओं का समाधान कराने और स्कूलों के शैक्षणिक स्तर को बढ़ाने सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी देंगे।