इस कमेटी में विभिन्न राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के अलावा, मानव संसाधन मंत्रालय के कई आला अधिकारी, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीपी) के चेयरमैन, सीबीएसई के चेयरमैन, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, वरिष्ठ आईएएस, शिक्षाविद् के अलावा सिविल सोसायटी के लोग इसमें शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि आरटीई के प्रयासों को गंभीरता के साथ सिरे चढ़ाने का कार्य इस कमेटी के जिम्मे होगा। यह कमेटी इस बात का अध्ययन भी करेगी कि बच्चे पढ़ क्यों नहीं रहे हैं? उनके फेल होने के पीछे क्या मुख्य कारण हैं और बच्चों को फेल न करने का फैसला कहां तक लाभदायक सिद्ध होगा? इसके अलावा शिक्षा के सिस्टम को अच्छा बनाने और परिणामों में सुधार पर यह कमेटी मंथन करेगी।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत यह फैसला लिया गया है कि किसी भी बच्चे को फेल नहीं किया जाएगा। हालांकि कई राज्य मानव संसाधन मंत्रालय के इस फैसले के पक्ष में हैं ङ्क्षकतु झारखंड, छत्तीसगढ़ सहित कई ऐसे राज्य हैं, जो इसके विरोध में हैं। इन राज्यों के शिक्षा मंत्रियों की ओर से इस पर आपत्ति भी दर्ज कराई है। तर्क दिया गया है कि उनके यहां शिक्षा का स्तर पहले से ही बहुत अच्छा नहीं है और अगर किसी को फेल नहीं किया गया तो बच्चों में बना बोर्ड का डर पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।
बताते हैं कि केंद्रीय मंत्रालय द्वारा श्रीमती भुक्कल की अध्यक्षता में बनाई गई यह कमेटी इन राज्यों की आपत्ति पर चर्चा करेगी और इस दिशा में कदम उठाएगी। एक नेशनल पॉलिसी बनाए जाने की भी खबर है। बताते हैं कि बच्चों को प्राइमरी स्टेज पर ही मजबूत बनाने की कोशिश केंद्रीय मंत्रालय की है और इसके लिए इस कमेटी की रिपोर्ट पर काफी कुछ निर्भर करेगा। यहां बता दें कि गीता भुक्कल ड्रॉफ्टिंग कमेटी की भी चेयरपर्सन हैं। इस कमेटी द्वारा नियम तैयार किए जा रहे हैं ताकि शिक्षा में गुणवत्ता आ सके।
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