Monday, May 14, 2012

मेडिकल में 15 जुलाई के बाद दाखिले नहीं

देश भर में एमबीबीएस एवं बीडीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लेकर उठने वाले विवादों के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा है कि हर सत्र में 15 जुलाई तक दाखिला प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए। अदालत ने यह व्यवस्था भी दी कि नये पाठ्यक्रम, अथवा सीट बढ़ाने या फिर मान्यता देने का फैसला भी इसी तिथि तक हो जाना चाहिए और अगर इसका उल्लंघन होता है तो अवमानना की कार्यवाही के अलावा विभागीय कार्रवाई की जाएगी। न्यायमूर्ति एके पटनायक व न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की पीठ ने ये दिशानिर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा है कि सरकार, एमसीआइ एवं डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया चालू शैक्षणिक सत्र के लिए कालेजों को अनुमति देने के बारे में 15 जुलाई तक फैसला कर लें। इसके बाद अनुमति नहीं दी जाएगी। अगर किसी साल इस तिथि के बाद अनुमति या मंजूरी दी जाती है तो उसे अगले शैक्षणिक सत्र के लिए माना जाएगा। कोर्ट ने कहा है कि मेडिकल या डेंटल पाठ्यक्रम में प्रवेश केवल प्रवेश परीक्षा के जरिए ही दिया जाना
चाहिए। यह परीक्षा राज्य के संबंधित प्राधिकारी या निजी कालेज निकाय द्वारा ली जानी चाहिए। अगर कोई सीट खाली रहती है या ऑल इंडिया कोर्ट से छोड़ी जाती है तो वह सीट आवंटित होनी चाहिए और प्रवेश योग्यता के आधार पर चालू सत्र के 15 सितंबर तक दे दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने चंडीगढ़ के जगदलपुर में सरकारी एनएमडीसी मेडिकल कालेज में मेधावी छात्रों की अनदेखी कर दो छात्राओं को प्रवेश देने के मामले में अधिकारियों पर अवमानना कार्यवाही शुरू की है। यह मामला 2006-07 के सत्र का है जब आकांक्षा आदिले व प्रिया गुप्ता को 30 सितंबर को प्रवेश दिया गया। इनमें एक छात्रा अधिकारी की पुत्री है। दोनों छात्राएं एमबीबीएस के अंतिम वर्ष में हैं इसे देखते हुए कोर्ट ने उनके प्रवेश को तो अवैध नहीं ठहराया है, लेकिन दोनों पर 5- 5 लाख रुपये जुर्माना किया है।