Monday, May 14, 2012

जनगणना पूरी, नहीं मिला कर्मचारियों को मेहनताना


जनगणना के आंकड़े पेश करके वाहवाही भी लूट ली गई है लेकिन जिन कर्मचारियों को आंकड़ें जुटाने के काम में लगाया गया था, उन हजारों कर्मचारियों को अभी तक इस काम का मेहनताना नहीं दिया गया है। इस काम में तैनात रहे कर्मचारियों की बात मानें तो किसी को भी भुगतान नहीं किया गया है, वहीं जनगणना से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि पैसा दिया जा चुका है।
संगरूर जिले में जनगणना के लिए चार ब्लाकों का सर्वेक्षण करने वाली मनजीत कौर ने कहा कि प्रत्येक ब्लाक के लिए तीन हजार रुपये और बाहर जाने के लिए दस दिनों के डेढ़ सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिए जाने थे। कई कर्मचारियों ने चार और कईयों ने तीन-तीन ब्लाक कवर किए। प्रत्येक ब्लाक में करीब पंद्रह सौ की आबादी के आंकड़े जुटाए गए। लेकिन इन कर्मचारियों को अब तक एक पैसा नहीं मिला है।
पटियाला जिले के नाभा ब्लाक से संबंधित कर्मचारी जनगणना दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। उन्हें भी पैसा नहीं मिला है। इस काम में लगे एक अध्यापक ने बताया कि यह जाति आधार पर की जनगणना का चरण था। उन्होंने काम पूरा करके दे दिया है लेकिन अब तक इसके लिए उन्हें कोई पैसा नहीं मिला है। आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन की अध्यक्ष ऊषा रानी ने कहा कि पंजाब में ही नहीं, किसी अन्य जगह भी पैसा नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि यूनियन ने यह मुद्दा इसलिए नहीं उठाया क्योंकि यह काम वर्करों ने ड्यूटी समय के बाद किया है। लेकिन यह करोड़ों का खेल है। हजारों कर्मचारियों का 17 से 18 हजार रुपये प्रति कर्मचारी बनता है।