Sunday, May 20, 2012

उच्च शिक्षा के ऋण पर सब्सिडी की योजना

केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए दिए जाने वाले ऋण पर सब्सिडी प्रदान करने की योजना है। यह सब्सिडी 12वीं कक्षा के बाद तकनीकी तथा व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने वाले उन विद्यार्थियों को दी जाएगी, जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय साढे़ चार लाख रुपये से अधिक नहीं है। ऋण पर सब्सिडी केवल उन्हीं विद्यार्थियों को दी जाएगी, जो केंद्र तथा राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संस्थानों में शिक्षा प्राप्त करेंगे। ऋण की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये निर्धारित की गई है। ऐसे ऋणों की वापसी कोर्स पूरा होने के एक वर्ष उपरांत अथवा नौकरी मिलने के छह महीने बाद, जो भी पहले हो, उसके आधार पर करनी होगी। इस अवधि के बाद ऋण की अदायगी न करने वाले विद्यार्थियों से शिक्षा ऋण योजना के अनुसार ब्याज की वसूली की जाएगी। इस योजना का लाभ केवल उन्हीं विद्यार्थियों को दिया जाएगा
जिनकी पारिवारिक आय साढे़ चार लाख रुपये से ज्यादा नहीं हो। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा राज्य सरकारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आर्थिक आधार पर आय प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकारी को नियुक्त करें। बैंक इसे राज्य सरकार द्वारा गठित जिला स्तरीय सलाहकार समिति की अधिसूचना के अनुसार लागू करेंगे। योजना के अंतर्गत ब्याज सब्सिडी का लाभ केवल एक ही बार उठाया जा सकता है। यह लाभ किसी अंडर ग्रेजुएट डिग्री कोर्स अथवा पोस्ट ग्रेजुएट/डिप्लोमा कोर्स के लिए उठाया जा सकेगा। ब्याज सब्सिडी का लाभ पूरे कोर्स के लिए दिया जाएगा। बीच में शिक्षा अधूरी छोड़ने वाले विद्यार्थियों को लाभ नहीं मिलेगा। अनुशासन व शैक्षणिक कारणों से संस्थान से निष्कासित होने वाले विद्यार्थियों को भी इस योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा। यदि स्वास्थ्य कारणों से कोई विद्यार्थी शिक्षा बीच में छोड़ता है तो उचित प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने पर उसे ब्याज सब्सिडी का लाभ मिल सकता है। योजना का लाभ प्रत्येक वर्ष एक अप्रैल से दिया जाता है। इस योजना के लिए केनरा बैंक को नोडल बैंक बनाया गया है, उसी के माध्यम से ही ऋण सब्सिडी प्रदान की जाएगी।