सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रमोशन में आरक्षण को असंवैधानिक बताने के बाद अब प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों में प्रमोशन व वरिष्ठता में आरक्षण कोटे को खत्म करने की बड़ी पहल कर दी है। इसके लिए सरकार ने यूपी राज्य सेवा अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अति पिछड़ा वर्ग आरक्षण अधिनियम 3 (7) व उप्र सरकार सेवक वरिष्ठता नियमावली की धारा 8 (अ) को खत्म करने के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया।
संबंधित प्रस्ताव को शुक्रवार देर शाम कैबिनेट बाई सर्कुलेशन द्वारा हरी झंडी दे दी गई। चूंकि आरक्षण अधिनियम में संशोधन होना है, इसलिए इससे संबंधित अध्यादेश देर रात मंजूरी के लिए राज्यपाल को भेजा दिया गया। राजभवन से हरी झंडी मिलने के बाद इसके बाद अधिकारियाें व कर्मचारियों को प्रमोशन का लाभ मिल सकेगा। यूपी संभवत: देश का पहला राज्य है जिसने प्रमोशन में आरक्षण खत्म करने का बड़ा फैसला किया है। सरकार के फैसले से प्रदेश के 16 लाख अधिकारियों व कर्मचारियों को अब प्रोन्नत का लाभ जल्द मिल सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल में 27 अप्रैल को अपने आदेश में प्रमोशन में आरक्षण को असंवैधानिक बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के निर्णय को जारी रखने का आदेश जारी किया था। नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को प्रशासनिक अमल में आने से पहले तक सरकारी विभागों को हिदायत दी थी कि वे अपनी तरफ से किसी तरह का प्रमोशन न करें।
कैबिनेट बाई सर्कुलेशन में निर्णय, सुप्रीम कोर्ट का फैसला प्रभावी
एक्ट में संशोधन के लिए राज्यपाल से मंजूर कराया जाएगा अध्यादेश
नए सिरे से हाेंगे प्रमोशन
अब चूंकि कैबिनेट ने नियमावली की विवादित धारा को खत्म कर दिया है, इसलिए जल्द एक्ट में बदलाव के लिए अध्यादेश मंजूर होने केे बाद सभी विभागों को नए सिरे से आदेश जारी होंगे। इसके आधार पर प्रमोशन नए सिरे से हो सकेंगे।
1.3
किस-किसको मिलेगा लाभ
500
प्रथम श्रेणी
1,00,00
तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
लाख कर्मियों को अध्यादेश मंजूर होने के बाद तत्काल लाभ मिलेगा
2500
द्वितीय श्रेणी