Tuesday, June 19, 2012

हिंदी पढ़ाने वालों को अंग्रेजी में थमाई सामग्री


जेबीटी विद्यार्थियों को नवीनतम तकनीक से पढ़ाने के लिए संबंधित विषय के प्राध्यापकों को प्रशिक्षण देने के लिए एससीईआरटी गुडग़ांव में चार दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में सोमवार को प्रशिक्षक हिंदी प्राध्यापकों को अंग्रेजी में सामग्री थमा दी गई।

एससीईआरटी व हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के बीच सामंजस्य ना होने के कारण इस कार्यशाला के औचित्य पर जहां सवालिया निशान लग गया है। शिक्षा बोर्ड की गलती के चलते लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी कार्यशाला का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाया। बोर्ड ने प्रदेश के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में अध्ययनरत विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने के लिए एससीईआरटी गुडग़ांव में 12 से 15 जून तक चार दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें पेपर संख्या डीई 201 अंडरस्टेंडिंग लेंग्वेज एंड अर्ली लिटरेसी, डीई 202 हिंदी प्रवीणता, डीई 203 प्रोफिसिएंसी इन इंग्लिश, डीई 204 मैथेमेटिक्स एजुकेशन फॉर प्राइमरी स्कूल चाइल्ड तथा डीई 251 व 252 क्रिएटिव ड्रामा एंड फाइन आट्र्स पढ़ाने वाले प्राध्यापकों को प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया था। कार्यशाला में विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए हिंदी प्राध्यापकों को अंग्रेजी में सामग्री दी गई। बाद में प्राध्यापकों ने इस पर विरोध जताते हुए कार्यशाला की संयोजिका ज्ञानवति से सामग्री को हिंदी में अनुवाद करवाने के लिए एक मांग पत्र भी सौंपा।

संयोजिका ने मामले को एससीईआरटी गुडग़ांव के डायरेक्टर के समक्ष ले जाते हुए प्राध्यापकों को भरोसा दिलवाया कि शीघ्र ही सामग्री में बदलाव किया जाएगा। इसके अलावा शिक्षा बोर्ड ने कार्यशाला शुरू होने से महज कुछ घंटे पहले ही एससीईआरटी को फैक्स भेज कर आधी अधूरी जानकारी भेजी। एससीईआरटी अधिकारियों को भी कार्यशाला शुरू होने से पहले तक ज्ञान नहीं था कि प्राध्यापकों को कैसे और किस प्रकार प्रशिक्षण देना है।

कार्यशाला

एससीईआरटी गुडग़ांव में सीनियर स्पेशलिस्ट के पद पर कार्यरत तथा उक्त कार्यशाला की कॉर्डिनेटर ज्ञानवति का कहना है कि यह कार्यशाला का प्रथम चरण था। इसमें बोर्ड के पास जो सामग्री थी वो अंग्रेजी में ही थी। प्राध्यापकों की परेशानी को देखते हुए उन्होंने शिक्षा बोर्ड से इस कार्यशाला के आगामी चरणों में सामग्री हिंदी में उपलब्ध करवाने का आग्रह किया है। वहीं कार्यशाला की डिटेल उन्हें कार्यशाला शुरू होने से पहले दिन सायं फैक्स पर मिली थी। लेकिन फिर भी उन्होंने बेहतर ढंग से इस कार्यशाला को चलाया। 

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