देश में कुछ साल पहले तक तकनीकी शिक्षण संस्थान खोलने होड़ लगी थी और अब इन्हें बंद करने की इजाजत मांगने वालों की लाइन लगी है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) के पास देश भर के करीब 150 तकनीकी शिक्षण संस्थानों ने आवेदन किया है कि उन्हें अपनी दुकान बंद करने की इजाजत दी जाए। ऐसा इसलिए उनके प्रबंधन और इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रमों के लिए छात्र ही नहीं मिल रहे हैं। सरकार का कहना है कि एआइसीटीई को चौदह राज्यों से 143 शिक्षण संस्थानों
ने अपने पाठ्यक्रम बंद करने की इजाजत मांगी है। ऐसा इस वजह से हुआ कि गुणवत्ता का ध्यान रखे बगैर देश भर में कुकुरमुत्ते की तरह तकनीकी शिक्षण संस्थान खुल गए। उदाहरण के तौर पर परिषद को अकेले आंध्र प्रदेश से ही 56 संस्थानों ने अपने पाठ्यक्रम बंद करने की इजाजत मांगी है। दो संस्थान तमिलनाडु के हैं और पांच कर्नाटक के। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस स्थिति का कारण इन तकनीकी शिक्षण संस्थानों में मांग से अधिक सीटें और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभाव होना है। जरूरत है कि संस्थान या तो स्तरीय शिक्षा दें या समाप्त हों। हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि देश में पैंतीस सौ से अधिक प्रबंधन संस्थान और चार हजार से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। एआइसीटीई का कहना है कि उसे मध्य प्रदेश से पांच, चंडीगढ़ से चार, पश्चिम बंगाल से दो और बिहार से एक कॉलेज से पाठ्यक्रम बंद करने का आवेदन मिला है। परिषद को राजस्थान से 18, उत्तर प्रदेश से 17 और गुजरात से भी 13 ऐसे आवेदन मिले हैं। परिषद को पंजाब और हरियाणा से भी छह-छह आवेदन मिले हैं।
ने अपने पाठ्यक्रम बंद करने की इजाजत मांगी है। ऐसा इस वजह से हुआ कि गुणवत्ता का ध्यान रखे बगैर देश भर में कुकुरमुत्ते की तरह तकनीकी शिक्षण संस्थान खुल गए। उदाहरण के तौर पर परिषद को अकेले आंध्र प्रदेश से ही 56 संस्थानों ने अपने पाठ्यक्रम बंद करने की इजाजत मांगी है। दो संस्थान तमिलनाडु के हैं और पांच कर्नाटक के। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस स्थिति का कारण इन तकनीकी शिक्षण संस्थानों में मांग से अधिक सीटें और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभाव होना है। जरूरत है कि संस्थान या तो स्तरीय शिक्षा दें या समाप्त हों। हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि देश में पैंतीस सौ से अधिक प्रबंधन संस्थान और चार हजार से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। एआइसीटीई का कहना है कि उसे मध्य प्रदेश से पांच, चंडीगढ़ से चार, पश्चिम बंगाल से दो और बिहार से एक कॉलेज से पाठ्यक्रम बंद करने का आवेदन मिला है। परिषद को राजस्थान से 18, उत्तर प्रदेश से 17 और गुजरात से भी 13 ऐसे आवेदन मिले हैं। परिषद को पंजाब और हरियाणा से भी छह-छह आवेदन मिले हैं।